बैंक खाताधारकों के लिए आरबीआई ने 2025 में कई बड़े बदलाव किए हैं ये नियम आपकी रोज़मर्रा की बैंकिंग को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाएंगे नए नियमों से निष्क्रिय खाते बंद होंगे, नामांकन की सुविधा बढ़ेगी और जीरो बैलेंस खातों को ज्यादा फायदे मिलेंगे।
इन बदलावों का मकसद बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करना है फ्रॉड रोकना, ग्राहकों को राहत देना और क्लेम प्रक्रिया को तेज करना मुख्य लक्ष्य हैं आरबीआई ने बैंकिंग लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट 2025 और अन्य दिशानिर्देशों के तहत ये नियम लागू किए सरकार और आरबीआई मिलकर ग्राहक हितों की रक्षा कर रहे हैं ये बदलाव नवंबर 2025 से लेकर अप्रैल 2026 तक चरणबद्ध तरीके से शुरू हो चुके हैं आम आदमी की बैंकिंग अब पहले से बेहतर होगी।
RBI Bank New Rules 2025
ये टेबल नए नियमों का संक्षिप्त अवलोकन देता है। आरबीआई के ये दिशानिर्देश बैंकिंग को ग्राहक अनुकूल बनाते हैं। मुख्य शब्द जैसे डोरमेंट, निष्क्रिय और BSBD को समझना ज़रूरी है।
नामांकन नियम क्या हैं?
नामांकन का मतलब है खाताधारक की मृत्यु पर पैसे या सामान किसे मिलेगा, ये पहले से तय करना। पहले सिर्फ एक नामांकक जोड़ सकते थे, अब बैंकिंग लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट 2025 के तहत 4 नामांकक जोड़ सकेंगे। ये सुविधा सेविंग, करंट अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, लॉकर और सेफ कस्टडी आर्टिकल्स पर लागू है।
साथ में नामांकन में हिस्सेदारी प्रतिशत तय कर सकते हैं, जैसे 25-25-25-25। क्रमानुसार नामांकन में पहला नामांकक न ले तो अगला ले लेगा। सरकार ने 1 नवंबर 2025 से इसे अनिवार्य किया, ताकि परिवार में विवाद न हो और क्लेम तेजी से सेटल हो। बैंक 3 कामकाजी दिनों में नामांकन रिकॉर्ड करेंगे और पासबुक पर दिखाएंगे।
निष्क्रिय और डोरमेंट खाते बंद क्यों?
निष्क्रिय खाता वह है जिसमें 12 महीने से कोई ग्राहक शुरू किया लेन-देन न हुआ हो। डोरमेंट खाता 2 साल से पूरी तरह निष्क्रिय है। आरबीआई ने फ्रॉड रोकने और KYC अनुपालन के लिए 20 दिसंबर 2025 से इन्हें बंद करने के नियम सख्त किए। जीरो बैलेंस खाते भी लंबे समय बिना बैलेंस के बंद हो सकते हैं।
ये बदलाव बैंकिंग सिस्टम को साफ-सुथरा बनाएंगे। पैसा सुरक्षित रहेगा, लेकिन एक्सेस सीमित हो सकता है। ग्राहक को ब्रांच जाकर KYC अपडेट और एक लेन-देन करना होगा reactivation के लिए। बैंक एसएमएस, ईमेल से अलर्ट भेजेंगे।
सरकार का मकसद फाइनेंशियल इंक्लूजन को बनाए रखना है, लेकिन पुराने बेकार खातों को हटाना। इससे बैंकिंग कॉस्ट कम होगी और साइबर फ्रॉड घटेगा।
BSBD खाते में क्या नई सुविधाएं?
बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) यानी जीरो बैलेंस खाता गरीबों और कम आय वालों के लिए है। आरबीआई ने रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट डायरेक्शन्स 2025 में बदलाव किए। अब हर महीने अनलिमिटेड डिपॉजिट, फ्री एटीएम/डेबिट कार्ड (निकासी या रिन्यूअल फीसなし), सालाना 25 पत्तों की चेकबुक मिलेगी।
महीने में कम से कम 4 फ्री निकासी (अपने या दूसरे बैंक के एटीएम से)। UPI, IMPS, NEFT, RTGS जैसे डिजिटल पेमेंट निकासी में नहीं गिने जाएंगे, ये फ्री रहेंगे। इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग और मंथली स्टेटमेंट या पासबुक भी फ्री। 1 अप्रैल 2026 से लागू, लेकिन बैंक पहले शुरू कर सकते हैं।
मौजूदा BSBD ग्राहक नई सुविधाएं मांग सकते हैं। सामान्य सेविंग खाता BSBD में बदल सकते हैं, अगर दूसरे बैंक में BSBD न हो। ये ग्राहकों को महंगा बैंकिंग से बचाएगा।
रोज़मर्रा बैंकिंग पर असर
अब नामांकन अपडेट करना आसान हो गया। परिवार के सभी सदस्यों को हिस्सा दे सकेंगे, विवाद कम होंगे। निष्क्रिय खाते रखने वालों को हर 12 महीने लेन-देन करना पड़ेगा, जैसे छोटा डिपॉजिट।
BSBD से गरीबों को फ्री डिजिटल बैंकिंग मिलेगी। लॉकर या FD के लिए भी 4 नामांकक। बैंक खाता खोलते समय नामांकन की जानकारी देना अनिवार्य। अगर नामांकन न चाहें तो लिखित घोषणा दें।
क्रेडिट कार्ड या लोन लेने वालों के लिए क्रेडिट स्कोर अपडेट साप्ताहिक होगा, लेकिन ये मुख्य नियमों से जुड़ा है। रोज़मर्रा में एटीएम चार्ज कम होंगे।
लागू करने के तरीके
नामांकन जोड़ने के लिए बैंक फॉर्म भरें, 3 दिनों में पासबुक पर अपडेट खाता सक्रिय रखने के लिए साल में 1-2 लेन-देन करें BSBD में कन्वर्ट के लिए ब्रांच जाएं, घोषणा दें कि दूसरा BSBD नहीं है निष्क्रिय खाते के लिए KYC अपडेट करवाएं। बैंक अलर्ट पर तुरंत कार्रवाई करें नए खाते खोलते समय नामांकन पूछें।
सरकार और आरबीआई की योजना
ये नियम बैंकिंग लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट 2025 के सेक्शन 10-13 से हैं। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया। आरबीआई ने रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट डायरेक्शन्स अपडेट किए उद्देश्य ग्राहक सुरक्षा, पारदर्शिता और फ्रॉड रोकना। सभी बैंकों पर एक समान लागू। बैंकिंग को डिजिटल इंडिया से जोड़ा इनसे करोड़ों ग्राहक लाभान्वित होंगे ये बदलाव आपकी बैंकिंग को सुरक्षित बनाएंगे। समय पर अपडेट रहें। भविष्य में और सुधार संभव।










