बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। नए साल से जमीन की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। सरकार सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
इससे खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। रजिस्ट्री शुल्क 30 से 100 फीसदी तक बढ़ सकता है। कई जगहों पर यह दो से तीन गुना भी हो सकता है।
Bihar Land Registry Update 2025
| विवरण | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| लागू होने की तारीख | जनवरी या अप्रैल 2026 से संभावित |
| बढ़ोतरी का अनुमान | 30-100% या 2-3 गुना तक |
| पुरानी दरें | शहरी: 2016, ग्रामीण: 2013 |
| प्रभावित क्षेत्र | शहरी वार्ड, नगर निगम, ग्रामीण पंचायत |
| उद्देश्य | राजस्व बढ़ाना, बाजार से तालमेल |
| समिति गठन | जिला स्तर पर मूल्यांकन समिति |
| मुख्य शुल्क | स्टांप ड्यूटी 6%, रजिस्ट्रेशन 2% |
| सलाह | दिसंबर तक रजिस्ट्री पूरी करें |
मुख्य शब्दों का अर्थ
एमवीआर यानी न्यूनतम मूल्यांकन दर या सर्किल रेट वह न्यूनतम कीमत है जो सरकार जमीन रजिस्ट्री के लिए तय करती है। यह बाजार मूल्य से कम हो सकती है लेकिन रजिस्ट्री इसी पर आधारित होती है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस इसी के प्रतिशत पर लगती है।
बदलाव की पूरी प्रक्रिया
बिहार सरकार के निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं। हर जिले में मूल्यांकन समिति बनेगी। ये समितियां पंचायत और वार्ड स्तर पर सर्वे करेंगी सड़क, बाजार, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं को देखा जाएगा। वास्तविक बाजार दर से तुलना होगी। रिपोर्ट जिला अधिकारी को भेजी जाएगी।
इसके बाद राज्य स्तर पर अंतिम मंजूरी मिलेगी। पटना जैसे शहरों में 75 वार्डों का मूल्यांकन चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में अंचलवार कमेटियां काम कर रही हैं।
पुरानी दरों की समस्या
शहरी क्षेत्रों में 2016 से पुरानी दरें चल रही हैं। ग्रामीण इलाकों में 2013 की दरें लागू हैं। इनसे रजिस्ट्री शुल्क बहुत कम लगता है बाजार मूल्य से 200-300 गुना अंतर है कुछ जगहों पर। इससे सरकार को कम राजस्व मिलता है। खरीदारों को फायदा होता था लेकिन अब सुधार होगा।
नई दरें लागू होते ही स्टांप ड्यूटी बढ़ेगी। उदाहरण के लिए 10 लाख की जमीन पर पहले 60 हजार स्टांप ड्यूटी लगती थी। अब यह दोगुनी या तिगुनी हो सकती है।
शुल्क कैसे लगता है
बिहार में स्टांप ड्यूटी सामान्यतः 6 प्रतिशत है। महिलाओं के नाम पर थोड़ी कम हो सकती है। रजिस्ट्रेशन शुल्क 2 प्रतिशत है कुल मिलाकर संपत्ति मूल्य का 8 प्रतिशत तक अतिरिक्त देना पड़ता है। एमवीआर जितना बढ़ेगा उतना बोझ बढ़ेगा। वाणिज्यिक संपत्ति पर 8 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगती है उदाहरण लें तो पटना के एक वार्ड में अगर पुराना एमवीआर 100 रुपये प्रति वर्गफुट है। नया 300 रुपये हो गया तो रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। खरीदारों को पहले हिसाब लगाना चाहिए।
किसे सबसे ज्यादा असर
शहरी क्षेत्र सबसे प्रभावित होंगे। नगर निगम वाले इलाकों में खरीद-बिक्री ज्यादा है। वहां सर्किल रेट ज्यादा बढ़ेगा नए विकसित इलाके, औद्योगिक क्षेत्रों में भी वृद्धि होगी। ग्रामीण इलाकों में कम लेकिन निश्चित बढ़ोतरी होगी। मकान, प्लॉट सभी पर असर पड़ेगा रियल एस्टेट कीमतें भी बढ़ेंगी। विक्रेता खुश होंगे लेकिन खरीदार सतर्क रहें। दिसंबर तक पुरानी दरों का फायदा उठाएं।
सरकार का उद्देश्य क्या
यह कोई नई योजना नहीं बल्कि एमवीआर की नियमित समीक्षा है। पहली बार 10 साल बाद हो रही है। मुख्य लक्ष्य राजस्व बढ़ाना है बाजार दर से मेल खाने से काला धन कम आएगा। पारदर्शिता बढ़ेगी। विकास वाले इलाकों को सही मूल्य मिलेगा। सरकार को इससे अरबों का फायदा होगा विभाग रोजाना रिपोर्ट मांग रहा है। सक्षम प्राधिकार से मंजूरी के बाद लागू होगा।
आवेदन कैसे करें पुरानी दर पर
जमीन खरीदने वाले दिसंबर में रजिस्ट्री पूरी करें। दस्तावेज तैयार रखें। निबंधन कार्यालय में आवेदन दें ऑनलाइन भुमिजानकारी पोर्टल पर एमवीआर चेक करें। स्टांप ड्यूटी पहले ही चुकाएं। समय पर रजिस्ट्रेशन करवाएं।
भविष्य में क्या होगा
नई दरें आने से संपत्ति बाजार सुधरेगा। लेकिन आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। सरकार को राजस्व से विकास कार्य होंगे लोगों को योजना बनानी चाहिए। कानूनी सलाह लें। कीमतें स्थिर रहेंगी दिसंबर तक नई रेट आने पर फिर अपडेट लेंगे। सतर्क रहें यह बदलाव जरूरी है लेकिन समय पर तैयारी करें। दिसंबर में काम निपटाएं। भविष्य में राहत मिलेगी।














